माध्यमिक स्तर के किशोर छात्रों में निर्देशन आवश्यकताओं और मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का संबंध - देहरादून जिले के संदर्भ में

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कु.शहनाज, डॉ. पूजा मिश्रा

Abstract

किशोरावस्था मानव विकास का सर्वाधिक संवेदनशील चरण है, जिसमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर तीव्र परिवर्तन होते हैं। इसी अवस्था में व्यक्तित्व, निर्णय-क्षमता, शैक्षणिक अभिवृत्ति और सामाजिक व्यवहार की आधारशिला रखी जाती है। भारत में, विशेषतः देहरादून जैसे शिक्षा-प्रधान जिले में, किशोर छात्र तीव्र प्रतिस्पर्धा, कैरियर दबाव, पारिवारिक अपेक्षाएँ और सामाजिक-सांस्कृतिक संक्रमण के कारण गंभीर मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। चिंता, अवसाद, आत्म-छवि अस्थिरता और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनसे निपटने में निर्देशन और परामर्श सेवाओं की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण बन जाती है।


इस अध्ययन में देहरादून जिले के माध्यमिक स्तर (कक्षा 9–12) के 300–500 छात्रों से प्रश्नावली, साक्षात्कार और अवलोकन के माध्यम से डेटा संकलित किया गया। सांख्यिकीय विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि शैक्षणिक दबाव, सामाजिक संबंधों में तनाव और कैरियर भ्रम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहे हैं। t-test, Chi-square और सहसंबंध विश्लेषण से यह भी पाया गया कि जिन छात्रों में मानसिक एवं भावनात्मक समस्याएँ अधिक थीं, उनमें परामर्श की आवश्यकता भी अधिक महसूस की गई। लड़कियों में भावनात्मक समस्याएँ तथा लड़कों में व्यवहारिक कठिनाइयाँ अधिक पाई गईं।

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कु.शहनाज, डॉ. पूजा मिश्रा. (2025). माध्यमिक स्तर के किशोर छात्रों में निर्देशन आवश्यकताओं और मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का संबंध - देहरादून जिले के संदर्भ में. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 2(1), 1041–1052. Retrieved from https://ijarmt.com/index.php/j/article/view/646
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