भारतीय राष्ट्रवाद के निर्माण में बंकिम चन्द्र चटर्जी और रविन्द्र नाथ टैगोर की वैचारिक भूमिकाः का एक अध्ययन
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Abstract
यह शोध-पत्र भारतीय राष्ट्रवाद के वैचारिक विकास में बंकिम चन्द्र चटर्जी और रविन्द्र नाथ टैगोर के योगदान का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के संक्रमणकाल में भारतीय समाज राजनीतिक दासता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और सामाजिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था। इस संदर्भ में बंकिम चन्द्र चटर्जी ने अपने साहित्य के माध्यम से एक सशक्त, सांस्कृतिक और धार्मिक आधार पर निर्मित राष्ट्रवाद की अवधारणा को प्रस्तुत किया, जिसमें “वंदे मातरम्” जैसे प्रतीक राष्ट्रीय चेतना के वाहक बने। दूसरी ओर, रविन्द्र नाथ टैगोर ने राष्ट्रवाद को एक व्यापक, मानवतावादी और सार्वभौमिक दृष्टिकोण से देखा, जिसमें संकीर्ण राष्ट्रवाद की आलोचना और विश्वबंधुत्व की भावना प्रमुख रही। यह अध्ययन दोनों विचारकों के साहित्यिक कृतियों, दार्शनिक दृष्टिकोणों और सामाजिक चिंतन का विश्लेषण करता है, ताकि यह समझा जा सके कि भारतीय राष्ट्रवाद का स्वरूप केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, नैतिक और मानवीय आयामों से भी निर्मित हुआ है। तुलनात्मक विश्लेषण के माध्यम से यह शोध यह स्पष्ट करता है कि जहाँ बंकिम का राष्ट्रवाद प्रेरणात्मक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर आधारित था, वहीं टैगोर का दृष्टिकोण उदार, आलोचनात्मक और वैश्विक चेतना से प्रेरित था। यह अध्ययन भारतीय राष्ट्रवाद की विविधता और उसकी जटिलता को समझने में सहायक सिद्ध होता है।
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