भारतीय संस्कृति और नारी सशक्तिकरण: परंपरा और आधुनिकता का समन्वय

Main Article Content

शशि प्रभा सिंह चैहान, डाॅ॰ अनीता राठी

Abstract

भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। वैदिक काल से ही स्त्रियों को शिक्षा, ज्ञान और धार्मिक आचरण में सहभागिता का अधिकार प्राप्त था। गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियों ने यह सिद्ध किया कि भारतीय परंपरा में स्त्री केवल गृहस्थ जीवन तक सीमित नहीं थी, बल्कि बौद्धिक और दार्शनिक विमर्श की भी धुरी थी। हालांकि, मध्यकालीन सामाजिक संरचना में स्त्रियों की भूमिका सीमित हुई और वे पितृसत्तात्मक व्यवस्था के अधीन होकर सामाजिक असमानताओं का सामना करने लगीं। स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान ने स्त्रियों को समान अधिकार प्रदान किए और नारी सशक्तिकरण की अवधारणा को विधिक, सामाजिक एवं राजनीतिक स्तर पर प्रोत्साहित किया।
आधुनिक युग में शिक्षा, रोजगार, राजनीति, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में महिलाओं ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। नारी सशक्तिकरण केवल आर्थिक स्वतंत्रता का पर्याय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता, आत्मनिर्णय, गरिमा और अवसरों की समान पहुँच का प्रतीक है। भारतीय समाज में परंपरा और आधुनिकता का समन्वय आवश्यक है, क्योंकि परंपरा के मूल्य नारी को परिवार और समाज के केंद्र में रखते हैं, वहीं आधुनिकता स्त्री को स्वतंत्रता और आत्मविश्वास प्रदान करती है। यदि दोनों का संतुलित रूप अपनाया जाए तो नारी न केवल स्वयं को सशक्त बना सकती है बल्कि समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में योगदान कर सकती है।
यह शोध पत्र भारतीय संस्कृति में नारी की ऐतिहासिक स्थिति, आधुनिक समय में नारी सशक्तिकरण की आवश्यकता, परंपरा और आधुनिकता के बीच अंतर्विरोध, चुनौतियाँ तथा समाधान पर प्रकाश डालता है। उद्देश्य यह है कि भारतीय समाज नारी के सांस्कृतिक गौरव और आधुनिक अवसरों के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाकर वास्तविक सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़े।

Article Details

How to Cite
शशि प्रभा सिंह चैहान, डाॅ॰ अनीता राठी. (2025). भारतीय संस्कृति और नारी सशक्तिकरण: परंपरा और आधुनिकता का समन्वय. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 2(3), 934–943. Retrieved from https://ijarmt.com/index.php/j/article/view/571
Section
Articles

References

. रमन, सीता, वूमेन इन इंडिया, प्रेगर, नई दिल्ली, 2009, खण्ड प्, पृ॰सं॰ 15-20

. कुमार, राधा, द हिस्ट्री ऑफ डूइंग: काली फॉर वूमेन, नई दिल्ली, 1993, पृ॰सं॰ 45-55

. कल्पगम, यू., मॉडर्निटी, ट्रैडिशन, एंड इंडियन वूमेन, ब्लूम्सबरी अकैडमिक इंडिया, नई दिल्ली, 2025, पृ॰सं॰ 1-5

. कलारामादम, सुनीथा, जेंडर, गवर्नेंस एंड एंपावरमेंट इन इंडिया, रूटलेज, 2016, पृ॰सं॰ 25-30

. कल्पगम, यू., मॉडर्निटी, ट्रैडिशन, एंड इंडियन वूमेन, ब्लूम्सबरी अकैडमिक इंडिया, नई दिल्ली, 2025, पृ॰सं॰ 12-14

. रमन, सीता, वूमेन इन इंडिया, प्रेगर, नई दिल्ली, 2009, खण्ड प्, पृ॰सं॰ 25-35

. कलारामादम, सुनीथा, जेंडर, गवर्नेंस एंड एंपावरमेंट इन इंडिया, रूटलेज, 2016, पृ॰सं॰ 32-38

. कुमार, राधा, द हिस्ट्री ऑफ डूइंग: काली फॉर वूमेन, नई दिल्ली, 1993, पृ॰सं॰ 57-62

Similar Articles

1 2 3 4 5 6 > >> 

You may also start an advanced similarity search for this article.