हरियाणा में कृषि नीतियों का विकास और किसान आंदोलनों पर उनका प्रभाव

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सर्वजीत

Abstract

यह शोध-पत्र हरियाणा राज्य में कृषि नीतियों के विकास और उनके किसानों पर पड़े प्रभाव का एक गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। हरियाणा का गठन 1966 में हुआ और इसके बाद राज्य ने कृषि क्षेत्र में तीव्र प्रगति की। विशेष रूप से हरित क्रांति के दौरान उच्च उत्पादकता वाले बीज, रासायनिक उर्वरक, आधुनिक मशीनरी और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने कृषि उत्पादन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। परिणामस्वरूप, हरियाणा देश के प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्यों में शामिल हो गया और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने लगा। हालाँकि, इस विकास के साथ कई जटिल समस्याएँ भी उभरकर सामने आईं। कृषि उत्पादन में वृद्धि के बावजूद किसानों की आय स्थिर नहीं रही, बल्कि लागत में निरंतर वृद्धि, ऋणग्रस्तता, जल संकट, भूमि की उर्वरता में कमी और बाजार की अनिश्चितता जैसी समस्याएँ बढ़ती गईं। इस शोध-पत्र में इन समस्याओं को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय तीनों दृष्टिकोणों से समझने का प्रयास किया गया है।
अध्ययन का मुख्य उद्देश्य 1966 से 2020 तक हरियाणा की कृषि नीतियों के विकासक्रम को समझना और यह विश्लेषण करना है कि इन नीतियों ने किसान आंदोलनों को किस प्रकार प्रभावित किया। न्यूनतम समर्थन मूल्य, सब्सिडी, सिंचाई विस्तार और फसल विविधीकरण जैसी नीतियाँ किसानों के लिए सहायक सिद्ध हुईं, परंतु इनकी सीमाएँ भी स्पष्ट हुईं। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों तक इन नीतियों का लाभ समान रूप से नहीं पहुँच पाया। इन नीतिगत असमानताओं और कमियों के कारण किसानों में असंतोष बढ़ा, जो समय-समय पर आंदोलनों के रूप में प्रकट हुआ। यह शोध-पत्र इस बात को स्पष्ट करता है कि किसान आंदोलन केवल आर्थिक समस्याओं का परिणाम नहीं थे, बल्कि वे नीतिगत असंतुलन और प्रशासनिक विफलताओं की प्रतिक्रिया भी थे। अंततः, यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि कृषि नीतियों और किसान आंदोलनों के बीच गहरा और परस्पर संबंध है, जिसे समझे बिना टिकाऊ और न्यायसंगत कृषि विकास संभव नहीं है।

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How to Cite
सर्वजीत. (2026). हरियाणा में कृषि नीतियों का विकास और किसान आंदोलनों पर उनका प्रभाव. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 3(1), 867–875. Retrieved from https://ijarmt.com/index.php/j/article/view/810
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References

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