बाल गंगाधर तिलक के स्वराज्य संबंधित विचार: एक दृष्टि

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डाॅ. अजय कुमार

Abstract

आधुनिक  भारत में राष्ट्र‌वाद के अग्रणी प्रणेताओं में बाल गंगाधर तिलक का नाम, सर्वोपरि माना जाता है। उनका सम्पूर्ण जीवन त्याग, तपस्या और बलिदान की ओजपूर्ण गाथा है। तिलक में राष्ट्रीय आन्दोलन में एक नई चेतना का संचार किया और राजनीतिक चेतना को बुध्दिजीवियों के वाणी- विलास की अपेक्षा जनमानस के स्वाभिमान और राष्ट्र गौरव की अनुभूति का पर्याय बना दिया। उद्यम देशभक्ति, मातृभूमि की  सेवा की उत्कृष्ट लालसा होती थी। का तिलक प्रकाण्ड विद्वान थे। उन्होंने वेदों, उपनिषदों और अन्य प्राचीन भारतीय ग्रन्थों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने “दि आर्कटिक होम इन ही वेदाज “ , “ओरामन वैदिक कोनोलॉजी एवम् वेदांग ज्योतिष,,” आदि ग्रन्थों की रचना की। उनका ग्रन्थ 'गीता रहस्य' भारतीय दर्शन में उनकी मौलिक अन्तर्दृष्टि का स्पष्ट प्रमाण है। केसरी मराठा' के सम्पादक के रूप में तिलक ने. सरकारी नौकरशाही की दमनकारी नीति के विरुद्ध अभियान छेड़ दिया। इन दोनों पत्रों में प्रकाशित और लेख  जनता को जागरण और स्वाभिमान का संदेश देते थे। 

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How to Cite
डाॅ. अजय कुमार. (2025). बाल गंगाधर तिलक के स्वराज्य संबंधित विचार: एक दृष्टि. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 2(3), 1244–1247. Retrieved from https://ijarmt.com/index.php/j/article/view/970
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Articles

References

मधुकर, श्याम प्रमुख भारतीय राजनीतिक विचारक, पृ० 247

२. तिलक राइटिंग्स एण्ड स्पीचेज, पृ०152

उपर्युक्त पृ. 169-70..

५. उपर्युक्त, पृ. 25

उपर्युक्त, पृ. 45

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