भारत में राजनीतिक वंचित वर्ग

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डाॅ. अजय कुमार

Abstract

भारत जो की एक प्रजातांत्रिक देष है और सरकार का संसादात्मक स्वरूप रखता है वहाँ ये भी जानना जरूरी है कि क्या सभी को उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है। क्योंकि भारत सामाजिक, सांस्कृतिक विविधताओं वाला देष है इसलिए मतों का विभिन्न स्तरों पर बँटवारा व एकत्रीकरण होना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में समाज के पिछड़े हुए वर्ग अपना उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त नही ंकर पाते और राजनीति रूप से वंचित रह जाते हैं। देष की आज़ादी के बाद नई संवैधानिक व्यवस्था शुरु होने के साथ ही कई वर्गों को आरक्षण दिया गया और सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर होने के बावजूद भी इन वर्गों ने आरक्षण का लाभ उठाकर अपनी स्थिति को प्रत्येक क्षेत्र में मजबूत किया जबकि कुछ वर्गों ने क्षेत्रीय स्तर पर अपनी संख्या बल के कारण अपने लिए उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्राप्त किया और कुछ वर्ग अपनी ऐतिहासिक पष्ठभूमि व व्यवस्था में पकड़ के कारण उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्राप्त कर पाए लेकिन जो वर्ग उपरोक्त किसी भी कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए वो राजनीतिक रूप से पिछड़ते चले गए। हालांकि पूरे देष की जनसंख्या के अनुपात में इन वर्गों की संख्या काफी मात्रा में है लेकिन क्षेत्र विषेष में एक ही स्थान पर इक्ट्ठी संख्या न होने के कारण क्षेत्र आधारित संसदीय क्षेत्रों में ये अपने सांसद, विधायक बनाने में पिछड़ गए। ये वर्ग वो वर्ग हैं जो ज्यादातर किसी कला विषेष से जुड़े व्यवसाय के साथ सम्बन्ध रखते हैं। इन्हें भारतीय सामाजिक व्यवस्था में विभिन्न जातियों के रूप मे देखा और समझा जा सकता है। जैसे नाई, धोबी, लोहार, कुम्हार, कायस्थ, भडबूँजा, सुनार, कलाल आदि। इन वर्गों की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है लेकिन दलितों से बेहतर है पर क्षेत्रीय स्तर पर अपनी सीमित जनसंख्या के कारण तुलनात्मक रूप से ये पिछड़ते गए हैं।

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How to Cite
डाॅ. अजय कुमार. (2025). भारत में राजनीतिक वंचित वर्ग. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 2(1), 1170–1173. Retrieved from https://ijarmt.com/index.php/j/article/view/969
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References

डाॅ. वी.एल. फडिया और डाॅ. कुलदीप फडिया, प्रमुख पश्चिमी राजनीतिक विचारक, काॅलेज बुक हाऊस, जयपुर, 2007

बार्कर, ग्रीक पालिटिकल थ्योरी, लंदन, 1752

ज्योतिप्रसाद सुदा, ए हिस्ट्री आॅफ पालिटिकल थोट, के साथ एण्ड कंपनी, मेरठ, 1997-98

फडिया

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