कुमार विश्वास के जीवन मूल्य, काव्य चेतना और व्यक्तित्व, संवेदना का एक आलोचनात्मक अध्ययन

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सुरेखा
डाॅ. बाबूराम

Abstract

समकालीन हिंदी कविता में डॉ. कुमार विश्वास का नाम केवल एक लोकप्रिय मंचीय कवि के रूप में ही नहीं, अपितु एक संवेदनशील चिंतक, सजग नागरिक और मानवीय मूल्यों के सजग प्रवक्ता के रूप में भी लिया जाता है। उनकी भाषा शैली शुद्ध हिंदी, लोकभाषा, उर्दू आवेग और भावनात्मक ऊष्मा का ऐसा सुंदर मिश्रण है, जो उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है। उनकी कविताओं और वक्तव्यों में प्रेम, राष्ट्रबोध, सामाजिक न्याय, करुणा, समानता, श्रम-सम्मान और मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों की स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनाई देती है। प्रस्तुत शोध-पत्र में डॉ. कुमार विश्वास के जीवन-मूल्यों, निजी एवं पारिवारिक जीवन, सार्वजनिक छवि (वेशभूषा), रचनात्मक दृष्टि, सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों तथा लेखन-ध्येय का समग्र विश्लेषण किया गया है। विशेष रूप से यह देखा गया है कि उनका निजी जीवन, पारिवारिक संबंध, सामाजिक अनुभव और मंचीय उपस्थिति किस प्रकार उनकी रचनाओं को आकार देते हैं। शोध का केन्द्र यह समझना है कि उनकी कविता मात्र ‘मनोरंजन’ नहीं, बल्कि अनुभव-समृद्ध जीवन-दृष्टि, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति है। यह शोध-पत्र मुख्यतः विश्लेषणात्मक और व्याख्यात्मक पद्धति पर आधारित है, जिसमें कुमार विश्वास के कवितासंग्रहों, सार्वजनिक वक्तव्यों, साक्षात्कारों तथा मंचीय प्रस्तुतियों के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व और कार्य-क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न सामग्री का समाहार किया गया है। निष्कर्षतः पाया गया कि कुमार विश्वास का काव्य-लोक प्रेम, राष्ट्रबोध और मानवता की त्रिवेणी पर आधारित है, जहाँ भाषा की सरलता, भावों की गहनता और सामाजिक चेतना का संतुलित समन्वय दिखाई देता है। इस प्रकार वे समकालीन हिंदी साहित्य में ऐसे कवि के रूप में उभरते हैं जो साहित्य और समाज, दोनों के बीच एक सजीव सेतु का कार्य करते हैं।

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How to Cite
सुरेखा, & डाॅ. बाबूराम. (2024). कुमार विश्वास के जीवन मूल्य, काव्य चेतना और व्यक्तित्व, संवेदना का एक आलोचनात्मक अध्ययन. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 1(2), 566–574. Retrieved from https://ijarmt.com/index.php/j/article/view/593
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Articles

References

कुमार विश्वास, अपने अपने राम, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली, पृ. 118

अजय विश्वकर्मा, आधुनिक हिंदी कविता के आयाम, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, पृ. 121

अरविंद कुमार, हिंदी साहित्य में आधुनिकता, नेशनल बुक ट्रस्ट, दिल्ली, पृ. 73

योगेश तिवारी, कविता और समाज का संबंध, साहित्य संगम, वाराणसी, पृ. 64

नरेश पांडेय, समकालीन कवियों की वैचारिक दिशा, प्रयाग बुक हाउस, इलाहाबाद, पृ. 109

रामकृष्ण यादव, कविता में मानवीय मूल्य और संवेदना, गंगा प्रकाशन, वाराणसी, पृ. 99

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