खादर संस्कृति के विविध स्वरूप: भौगोलिक सांस्कृतिक अवलोकन

Main Article Content

रेणु कुमारी
डाॅ॰ प्रदीप कुमार शर्मा

Abstract

हरियाणा की सांस्कृतिक संरचना एकरूप न होकर अनेक भौगोलिक, ऐतिहासिक, सामाजिक और पारिस्थितिक अंचलों में विकसित हुई है। खादर उनमें एक महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक-भौगोलिक क्षेत्र है। सामान्यतः खादर से आशय नदी के सक्रिय बाढ़-मैदान तथा अपेक्षाकृत नवीन जलोढ़ निक्षेपों से है। हरियाणा के संदर्भ में खादर विशेषतः यमुना तथा उससे संबद्ध नदी-मैदानी क्षेत्रों से जुड़ी सांस्कृतिक पहचान का भी संकेतक है। भारत सरकार द्वारा हरियाणा के जिन पारिस्थितिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है, उनमें खादर के साथ बाँगर, बागड़, अहीरवाल, मेवात आदि क्षेत्र भी सम्मिलित हैं।
प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य खादर संस्कृति के विविध स्वरूपों का समग्र अध्ययन करना है। इसमें खादर की भौगोलिक पृष्ठभूमि, ऐतिहासिक विकास, कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, ग्राम-व्यवस्था, परिवार एवं सामाजिक संगठन, भाषा एवं बोली, लोकगीत, लोककथा, लोकनाट्य, सांग, पर्व-त्योहार, विवाह-संस्कार, जन्म-मृत्यु संस्कार, वेशभूषा, पगड़ी, भोजन, लोककला, शिल्प, धार्मिक विश्वास, पर्यावरणीय ज्ञान, स्त्री-जीवन, युवा पीढ़ी, शिक्षा, आधुनिकता तथा सांस्कृतिक संरक्षण जैसे पक्षों का विश्लेषण किया गया है।
अध्ययन से स्पष्ट होता है कि खादर संस्कृति को किसी एक जाति, समुदाय अथवा स्थिर परंपरा की संस्कृति के रूप में नहीं समझा जा सकता। यह नदी, मिट्टी, कृषि, पशुपालन, ग्राम-समाज और विभिन्न समुदायों के दीर्घकालीन पारस्परिक संपर्क से निर्मित जीवंत सांस्कृतिक प्रक्रिया है। खादर की संस्कृति में परंपरा और आधुनिकता का सह-अस्तित्व दिखाई देता है। एक ओर लोकगीत, लोककथा, सांग, पारंपरिक भोजन, वेशभूषा और सामाजिक रीति-रिवाज आज भी सांस्कृतिक पहचान बनाए हुए हैं, दूसरी ओर शिक्षा, शहरीकरण, डिजिटल मीडिया, कृषि-यंत्रीकरण और रोजगार के बदलते अवसर नई सांस्कृतिक प्रवृत्तियों को जन्म दे रहे हैं।

Article Details

How to Cite
रेणु कुमारी, & डाॅ॰ प्रदीप कुमार शर्मा. (2024). खादर संस्कृति के विविध स्वरूप: भौगोलिक सांस्कृतिक अवलोकन. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 1(2), 818–831. Retrieved from https://ijarmt.com/index.php/j/article/view/1244
Section
Articles

References

अग्रवाल, डी. पी. एवं ए. घोष (सम्पा.), रेडियोकार्बन एंड इंडियन आर्कियोलॉजी, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, बंबई, 1973

बाशम, ए. एल., द वंडर दैट वाज इंडिया, सिडग्विक एंड जैक्सन, लंदन, 1954

केनोयर, जोनाथन मार्क, एंशिएंट सिटीज ऑफ द इंडस वैली सिविलाइजेशन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस एवं अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ पाकिस्तान स्टडीज, कराचीध्ऑक्सफोर्ड, 1998

पॉसेल, ग्रेगरी एल., द इंडस सिविलाइजेशन: ए कंटेम्पररी पर्सपेक्टिव, अल्टामीरा प्रेस, वॉलनट क्रीक, कैलिफोर्निया, 2002

शर्मा, जी. आर., “मेसोलिथिक लेक कल्चर्स इन द गंगा वैली, इंडिया”, गंगा घाटी के पुरातात्त्विक एवं पर्यावरणीय विकास से संबंधित शोध-अध्ययन

Similar Articles

<< < 1 2 3 4 5 6 7 > >> 

You may also start an advanced similarity search for this article.