कौटिल्य के सप्ताङ्ग सिद्धान्त में 'योगक्षेम': सुशासन, सम्प्रभुता और लोक-कल्याण का एक आलोचनात्मक विश्लेषण

Main Article Content

डॉ ऋचा शर्मा

Abstract

कौटिल्य का अर्थशास्त्र प्राचीन भारतीय राज्यशास्त्र का एक ऐसा कालजयी ग्रंथ है, जो समकालीन राजनीतिक चिंतन और सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों को आज भी नई दिशा प्रदान करता है। प्रस्तुत अध्ययन कौटिल्य के 'सप्ताङ्ग सिद्धान्त' का पुनर्पाठ करते हुए यह प्रतिपादित करता है कि राज्य के सातों अङ्ग (स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोश, दण्ड, मित्र) केवल यांत्रिक प्रशासनिक इकाइयाँ नहीं हैं, बल्कि उनका एकमात्र दार्शनिक और व्यावहारिक औचित्य प्रजा के 'योगक्षेम' (अप्राप्त संसाधनों का अर्जन और प्राप्त संसाधनों का संरक्षण व न्यायपूर्ण वितरण) को सिद्ध करना है। यह आलेख कौटिल्य के यथार्थवाद की तुलना पाश्चात्य यथार्थवादी परंपरा से करते हुए एंटोनियो ग्राम्शी, मिशेल फूको, मैक्स वेबर, कार्ल श्मिट, थॉमस हॉब्स, अरस्तू और जॉन रॉल्स जैसे आधुनिक राजनीतिक विचारकों के साथ एक आलोचनात्मक संवाद स्थापित करता है। यह विश्लेषण सिद्ध करता है कि कौटिल्य का शासन-मॉडल शुष्क शक्ति-राजनीति और अव्यावहारिक आदर्शवाद के परे 'नैतिक यथार्थवाद' (Normative Realism) पर आधारित लोक-कल्याणकारी राज्य का एक कालजयी और वैश्विक विकल्प प्रस्तुत करता है।

Article Details

How to Cite
डॉ ऋचा शर्मा. (2026). कौटिल्य के सप्ताङ्ग सिद्धान्त में ’योगक्षेम’: सुशासन, सम्प्रभुता और लोक-कल्याण का एक आलोचनात्मक विश्लेषण . International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 3(3), 241–253. Retrieved from https://ijarmt.com/index.php/j/article/view/1154
Section
Articles

References

• Kangle, R. P. (Ed. & Trans.). (1960–1965). The Kautiliya Arthasastra (Parts I, II, & III). University of Bombay / Motilal Banarsidass.

• Shamasastry, R. (Trans.). (1915). Kautilya’s Arthashastra. Mysore Printing and Publishing House.

• श्रीवास्तवानन्द, पं. (संपादक). (२००१). कौटिल्यीयम् अर्थशास्त्रम् (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद). चौखम्बा विद्याभवन, वाराणसी।

• Aristotle. (1999). Nicomachean Ethics (T. Irwin, Trans.). Hackett Publishing Company.

• Boesche, R. (2002). The First Great Political Realist: Kautilya and His Arthashastra. Lexington Books.

• Foucault, M. (2007). Security, Territory, Population: Lectures at the Collège de France 1977–1978 (M. Senellart, Ed.; G. Burchell, Trans.). Palgrave Macmillan.