प्राचीन भारत से मध्यकालीन भारत तक पर्यावरण की स्थितिः एक वैचारिक अध्ययन

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रेनु
डाॅ. कुमारी सुमन

Abstract

प्रस्तुत शोध प्राचीन से लेकर मध्यकालीन समय तक भारतीय उपमहाद्वीप की पर्यावरणीय स्थितियों की जांच करता है। यह विश्लेषण करता है कि सदियों से जलवायु, भूगोल, जंगल, नदियाँ, पेड़-पौधे और जीव-जंतु, और मानव-प्रकृति का आपसी संबंध कैसे विकसित हुआ। यह अध्ययन इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि प्राचीन सभ्यताओं ने पारिस्थितिक स्थितियों के अनुसार खुद को कैसे ढाला और मध्यकालीन समय के बदलावों जैसे कृषि विस्तार, शहरीकरण और युद्ध ने प्राकृतिक पर्यावरण को कैसे प्रभावित किया। पेपर का निष्कर्ष है कि निरंतरता और बदलाव दोनों ने भारत के पर्यावरणीय इतिहास को आकार दिया, जो प्रकृति और मानव समाज के बीच एक नाजुक संतुलन को दर्शाता है।

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How to Cite
रेनु, & डाॅ. कुमारी सुमन. (2026). प्राचीन भारत से मध्यकालीन भारत तक पर्यावरण की स्थितिः एक वैचारिक अध्ययन. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 3(1), 660–667. Retrieved from https://ijarmt.com/index.php/j/article/view/774
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References

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