राजस्थानी और पहाड़ी चित्रकला में नृत्य मुद्राओं का तुलनात्मक अध्ययन
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Abstract
भारतीय संस्कृति में चित्रकला और नृत्य दोनों ही प्राचीन एवं समृद्ध कलात्मक परंपराएँ हैं। भारतीय लघुचित्रकला की राजस्थानी एवं पहाड़ी शैलियाँ न केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों को अभिव्यक्त करती हैं, बल्कि उनमें नृत्य, संगीत तथा भावाभिव्यक्ति के विविध आयाम भी दृष्टिगोचर होते हैं। विशेष रूप से नृत्य मुद्राओं का चित्रण इन चित्रशैलियों की कलात्मक उत्कृष्टता तथा सांस्कृतिक चेतना का परिचायक है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य राजस्थानी एवं पहाड़ी चित्रकला में चित्रित नृत्य मुद्राओं का तुलनात्मक अध्ययन करना है। अध्ययन में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध पद्धति का उपयोग किया गया है। विभिन्न संग्रहालयों, प्रकाशित शोधग्रंथों तथा कला-साहित्य में उपलब्ध चित्रों के आधार पर नृत्य मुद्राओं का विश्लेषण किया गया है।
अध्ययन से ज्ञात होता है कि राजस्थानी चित्रकला में नृत्य मुद्राएँ अधिक गतिशील, अलंकृत एवं दरबारी सौंदर्य से युक्त हैं, जबकि पहाड़ी चित्रकला में नृत्य मुद्राएँ अधिक भावप्रधान, लयात्मक तथा प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण दिखाई देती हैं। दोनों शैलियों में भारतीय नाट्यशास्त्रीय परंपरा, विशेषकर श्रृंगार एवं भक्ति रस की प्रभावी उपस्थिति परिलक्षित होती है। अध्ययन भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा दृश्य एवं प्रदर्शनकारी कलाओं के अंतर्संबंध को समझने में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।
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