वित्तीय समावेशन में ई-बैंकिंग की प्रभावशीलता: उत्तर बिहार के संदर्भ में एक अध्ययन
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Abstract
वित्तीय समावेशन को किसी भी अर्थव्यवस्था के समावेशी एवं संतुलित विकास की आधारशिला माना जाता है, तथा हाल के वर्षों में ई-बैंकिंग सेवाओं के विस्तार को वित्तीय समावेशन को गति देने वाले सबसे प्रभावी माध्यमों में गिना गया है। प्रस्तुत अध्ययन उत्तर बिहार क्षेत्र के संदर्भ में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में ई-बैंकिंग सेवाओं की प्रभावशीलता का विश्लेषण करता है, तथा इस संबंध में शहरी एवं ग्रामीण बैंक ग्राहकों की तुलना प्रस्तुत करता है। संरचित प्रश्नावली के माध्यम से उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों से 250 बैंक ग्राहकों, जिनमें शहरी क्षेत्र से 125 तथा ग्रामीण क्षेत्र से 125 उत्तरदाता सम्मिलित थे, से आंकड़े एकत्रित किए गए। वित्तीय समावेशन को बैंक खाता स्वामित्व एवं उपयोग, बचत तक पहुंच, साख तक पहुंच तथा डिजिटल लेन-देन की आवृत्ति जैसे आयामों के आधार पर मापा गया तथा शून्य से सौ के मान वाला एक समग्र सूचकांक तैयार किया गया। स्वतंत्र प्रतिदर्श t-परीक्षण तथा काई-वर्ग परीक्षण के माध्यम से दो शून्य परिकल्पनाओं का परीक्षण किया गया। परिणामों से स्पष्ट होता है कि शहरी उत्तरदाताओं का समग्र वित्तीय समावेशन सूचकांक, माध्य 74.1 तथा मानक विचलन 9.8, ग्रामीण उत्तरदाताओं, माध्य 54.8 तथा मानक विचलन 12.4, की तुलना में सार्थक रूप से अधिक पाया गया, t(248) बराबर 13.20, p 0.001 से कम। इसके साथ ही ई-बैंकिंग उपयोग की श्रेणी तथा वित्तीय समावेशन स्तर के बीच भी एक सार्थक संबंध पाया गया, काई-वर्ग मान चार स्वतंत्रता कोटि तथा 250 प्रतिदर्श के लिए 101.40, p 0.001 से कम, जिसमें नियमित ई-बैंकिंग उपयोगकर्ताओं में उच्च वित्तीय समावेशन का अनुपात सबसे अधिक रहा। दोनों शून्य परिकल्पनाएँ अस्वीकृत की गईं। अध्ययन के परिणाम डिजिटल साक्षरता, संपर्क अवसंरचना तथा भाषा-अनुकूल अंतरापृष्ठ से जुड़ी बाधाओं को दूर करने वाले, ग्रामीण-केंद्रित ई-बैंकिंग प्रोत्साहन कार्यक्रमों की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
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