भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय संसाधनों की उपलब्धता एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के उपयोग व्यवहार का अध्ययन।

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डॉ जूही चौहान

Abstract

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालयीय पुस्तकालय ज्ञान, अनुसंधान एवं बौद्धिक विकास के प्रमुख आधार माने जाते हैं। आधुनिक युग में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास ने पुस्तकालयों के स्वरूप, सेवाओं तथा उपयोग व्यवहार में व्यापक परिवर्तन उत्पन्न किया है। वर्तमान समय में पुस्तकालय केवल मुद्रित पुस्तकों तक सीमित न रहकर ई-पुस्तकों, ई-जर्नलों, डिजिटल डेटाबेस, ऑनलाइन शोध सामग्री तथा सूचना संसाधनों के बहुआयामी केंद्र बन चुके हैं। विशेष रूप से स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय शैक्षणिक उपलब्धि, शोध अभिवृत्ति तथा ज्ञान संवर्धन का प्रमुख माध्यम है।


प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उपलब्ध पुस्तकालय संसाधनों की स्थिति तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के उपयोग व्यवहार का विश्लेषण करना है। अध्ययन हेतु 300 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों का चयन किया गया। अध्ययन में वर्णनात्मक सर्वेक्षण पद्धति का उपयोग किया गया तथा आंकड़ों के संकलन हेतु प्रश्नावली का प्रयोग किया गया। प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण प्रतिशत पद्धति के माध्यम से किया गया।


अध्ययन से यह ज्ञात हुआ कि विश्वविद्यालयों में मुद्रित एवं डिजिटल दोनों प्रकार के संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता विद्यमान है। विद्यार्थियों द्वारा शोध कार्य, संदर्भ अध्ययन तथा ई-संसाधनों के उपयोग में वृद्धि देखी गई। तथापि तकनीकी अवसंरचना, डिजिटल साक्षरता तथा संसाधनों की समान उपलब्धता जैसी समस्याएँ अभी भी विद्यमान हैं।

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डॉ जूही चौहान. (2026). भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय संसाधनों की उपलब्धता एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के उपयोग व्यवहार का अध्ययन।. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 3(1), 1388–1401. https://doi.org/10.65578/ijarmt.v3.i1.991
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