इतिहासलेखन में राव तुलारामः औपनिवेशिक और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण का तुलनात्मक अध्ययन
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Abstract
यह विस्तृत शोध-पत्र 1857 के विद्रोह के संदर्भ में राव तुलाराम के इतिहासलेखन का गहन एवं आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि औपनिवेशिक और राष्ट्रवादी इतिहासकारों द्वारा एक ही ऐतिहासिक व्यक्तित्व को किस प्रकार भिन्न-भिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत किया गया है। औपनिवेशिक लेखन में राव तुलाराम को एक क्षेत्रीय विद्रोही और अस्थिरता उत्पन्न करने वाले नेता के रूप में चित्रित किया गया, जबकि राष्ट्रवादी इतिहासकारों ने उन्हें एक वीर, दूरदर्शी और राष्ट्रभक्त नेता के रूप में स्थापित किया। यह शोध इन दोनों दृष्टिकोणों के वैचारिक आधार, स्रोतों के उपयोग, और उनके राजनीतिक उद्देश्यों का विश्लेषण करते हुए यह तर्क प्रस्तुत करता है कि एक संतुलित इतिहासलेखन के लिए बहु-स्रोत और आलोचनात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।
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