उपेंद्रनाथ अश्क के अंजो दीदी नाटक में अभिजात्य वर्ग की नारी
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Abstract
अभिजात्य वर्ग से अभिप्राय एक विशेष व्यक्ति से है जो धन संपदा सुख सुविधायों से संपन्न हो और विशेष अधिकार रखता हो। अंजलि भी इस नाटक में एक ऐसी नारी है जिसके अंदर यह बीज परंपरागत हैं। जो उसे अपने नाना की विरासत से मिले हैं अंजलि में अपने वर्ग की सभी प्रवृत्तियां शामिल हैं जो उसके अंदर हमेशा घर बनाए रहती हैं । अंजो एक ऐसी नारी है जो मनुष्य के जीवन को नियंत्रित और अनुशासित बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है वह मनुष्य को अपने विचारों के अनुसार रखना चाहती है आरंभ में ही नाटक के अंजो का अपने नौकरों के ऊपर नियंत्रण देखने को मिलता है। “मुन्नी नाश्ता रखो मेज पर तुम क्या कर रही हो? आठ बज गए हैं और नाश्ते का कहीं पता नहीं।1
वह अपने बेटे नीरज को भी स्कूल के लिए तैयार होने को कहती है हड़बड़ी में “नीरज बेटा कपड़े बदल लिए तुमने2
वह हर काम को समय पर चाहती है अगर वह काम उसे थोड़ी सी भी देरी लगे तो उसमें वह गुस्सा होती है। अगर उसके घर के नौकर साफ सुथरे कपड़े नहीं पहनते तो भी उन पर वह गुस्सा करती है और उन्हें साफ सुथरे कपड़े पहनने के लिए प्रेरित करती है।
अंजो को यह सब कुछ उसे विरासत में मिला है अगर कोई भी बात हो तो वह अपना नाना जी का उदाहरण बताती है सब कुछ उसके अंदर नाना को ही देखने को मिलता है।
“हमारे नाना जी कहां करते थे नौकरों को साफ सुथरा रखना चाहिए जैसे घर के भाग्य का पता चलता है वैसे ही मालिकों के सत्र का पता नौकरों के पहनावे से लगता है गंदे नौकरों से नाना जी को बड़ी चीड़ थी।3
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References
उपेंद्रनाथ अश्क,अंजो दीदी नाटक, प्रथम संस्करण 1955, पृष्ठ 26
वहीं, पृष्ठ 27
वही, पृष्ठ 29
वही, पृष्ठ 34
वही, पृष्ठ 32
वही, पृष्ठ 37