आध्यात्मिक पद्धतियाँ एवं मानव कल्याण : समकालीन भारतीय समाज का एक समाजशास्त्रीय अध्ययन

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प्रतिभा शंकरराव साबले, डॉ. सोनाली पंडित

Abstract


  • प्रस्तुत शोध-पत्र यह विश्लेषित करता है कि योग, ध्यान, प्रार्थना, जप, सत्संग, सेवा तथा डिजिटल आध्यात्मिक अभ्यास जैसी आध्यात्मिक पद्धतियाँ समकालीन भारतीय समाज में मानव कल्याण के मानसिक, शारीरिक, सामाजिक तथा समग्र आयामों को किस प्रकार प्रभावित करती हैं। विश्लेषण को दुर्खीम, वेबर, मार्क्स, बर्जर तथा सामाजिक पूँजी सिद्धांत के आलोक में व्याख्यायित किया गया है। निष्कर्ष दर्शाते हैं कि आध्यात्मिक पद्धतियाँ तनाव, चिंता तथा अवसाद में मध्यम स्तर की कमी, अर्थ-निर्माण तथा लचीलेपन में वृद्धि, पारिवारिक सामंजस्य तथा सामाजिक पूँजी के निर्माण से जुड़ी हैं। यह प्रभाव मुख्यतः चार सामाजिक तंत्रों—सामाजिक समर्थन, अर्थ-निर्माण, आत्म-नियमन तथा सामुदायिक जुड़ाव—के माध्यम से कार्य करता है। साथ ही, आध्यात्मिकता का बाज़ारीकरण तथा डिजिटल उपभोग इसके सामुदायिक आधार को कमजोर कर सकते हैं। शोध-पत्र नीति, शिक्षा, कार्यस्थल तथा भावी अनुभवजन्य शोध हेतु सुझाव प्रस्तुत करता है।

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प्रतिभा शंकरराव साबले, डॉ. सोनाली पंडित. (2025). आध्यात्मिक पद्धतियाँ एवं मानव कल्याण : समकालीन भारतीय समाज का एक समाजशास्त्रीय अध्ययन. International Journal of Advanced Research and Multidisciplinary Trends (IJARMT), 2(3), 1491–1500. Retrieved from https://ijarmt.com/index.php/j/article/view/1339
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