हितोपदेश में मित्रता-दर्शन और 21वीं सदी के डिजिटल संबंधों का पुनर्मूल्यांकन
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Abstract
संस्कृत साहित्य का अमूल्य ग्रंथ हितोपदेश केवल नीति-कथाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि जीवन के आचरण का दर्पण है। इस ग्रंथ में मित्रता को निकट दृष्टि से देखा गया है। 21वीं सदी में डिजिटल युग के आने के साथ "मित्रता" का स्वरूप ही परिवर्तित हो चुका है। जहाँ सोशल मीडिया ने आकर वास्तविक मित्रता का स्वरूप ही बदल कर रख दिया है, इस शोध-पत्र में मित्रता-संबंधी श्लोकों का वर्णन भी किया गया है और उनके आधार पर आधुनिक समाज की नैतिक चुनौतियों का मूल्यांकन प्रस्तुत किया गया है। परिणाम स्वरूप यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन संस्कृत नीति आज भी सभी के लिए मार्गदर्शक है। सच्ची मित्रता में विश्वास, सत्य, विवेक, निःस्वार्थता आदि गुण विद्यमान होते हैं।
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References
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