आदिवासी महिला नेतृत्व और भारतीय जनआंदोलन: ऐतिहासिक एवं वैचारिक परिप्रेक्ष्य
Main Article Content
Abstract
प्रस्तुत शोध-पत्र भारतीय जनजातीय आंदोलनों में आदिवासी महिलाओं की ऐतिहासिक, सामाजिक एवं वैचारिक भूमिका का गहन विश्लेषण करता है। औपनिवेशिक काल से लेकर वर्तमान समय तक आदिवासी महिलाओं ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा, सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक पहचान और समुदाय की स्वायत्तता के लिए अनवरत संघर्ष किया है। यह शोध-पत्र संथाल हूल, मुंडा उलगुलान, भील आंदोलन जैसे ऐतिहासिक विद्रोहों में महिलाओं की सहभागिता से लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन, वनाधिकार आंदोलन तथा खनन विरोधी संघर्षों में उनकी अग्रणी भूमिका तक के विविध आयामों को रेखांकित करता है। नारीवादी, उपनिवेशोत्तर और सबाल्टर्न दृष्टिकोणों के माध्यम से यह विश्लेषण स्पष्ट करता है कि आदिवासी महिलाओं का संघर्ष केवल लैंगिक अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामुदायिक सशक्तिकरण, पर्यावरणीय न्याय और वैकल्पिक विकास दृष्टि से भी जुड़ा हुआ है।
Article Details

This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International License.
References
गुहा, रंजीत (1999). एलीमेंटरी आस्पेक्ट्स ऑफ पेज़ेंट इनसर्जेंसी इन कोलोनियल इंडिया. नई दिल्ली: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस।
चटर्जी, पार्था (1993). द नेशन एंड इट्स फ्रैगमेंट्स. प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस।
मजूमदार, डी. एन. (1958). ट्राइब्स एंड क्रॉपर्स ऑफ इंडिया. लखनऊ: यूनिवर्सल पब्लिशर्स।
नंदी, आशीष (2001). एन एंबिगुअस जर्नी टू द सिटी. नई दिल्ली: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस।
रॉय बर्मन, बी. के. (1994). ट्राइबल पॉलिटिक्स इन इंडिया. नई दिल्ली: मनोहर पब्लिशर्स।
सिंह, के. एस. (1985). ट्राइबल सोसाइटी इन इंडिया. नई दिल्ली: मनोहर पब्लिशर्स।
शाह, गणेश (2004). सोशल मूवमेंट्स इन इंडिया. नई दिल्ली: सेज पब्लिकेशन्स।
विश्वनाथन, शिव (2005). ए कार्निवल फॉर साइंस. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस।
पाटकर, मेधा (1995). स्ट्रगल फॉर पार्टिसिपेटरी डेमोक्रेसी. नई दिल्ली: पीपल्स यूनियन।
मिश्रा, सौदामिनी (2016). ट्राइबल वुमेन एंड फॉरेस्ट राइट्स. भोपाल: मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी।
वनाधिकार अधिनियम (2006). अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम। भारत सरकार।
झा, जगदीश कुमार (2013). भारत में आदिवासी आंदोलन: एक ऐतिहासिक विवेचन. पटना: बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी।